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शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

क्या है फोन-टैपिंग का फंडा ??


पिछले कुछ दिनों तक संसद में फोन-टैपिंग का इश्यू गरमाया हुआ था। सरकार पर विपक्षी दलों के फोन टैप करने का आरोप था। मामले में जबर्दस्त किचकिच हुई और संसद के दोनों सदनों को कई बार स्थगित करना पड़ा। सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए जांच से इंकार कर दिया।

आइए जानते हैं कि क्या है फोन-टैपिंग, इससे जुड़े नियम और कानून..

किसी के फोन, मोबाइल पर होने वाली बातचीत को सीक्रेट ढंग से रिकॉर्ड करना फोन-टैपिंग कहलाती है। इसमें कोई तीसरा व्यक्ति दो लोगों के बीच हो रही बातचीत को रिकॉर्ड करता है या सुनता है। किसी भी व्यक्ति का फोन टैप करना एक क्राइम है, जब तक की फोन टैप कर रहे डिपार्टमेंट को इसकी परमीशन न मिल गई हो। बतौर उदाहरण अगर किसी पर शक है कि वह आतंकी गतिविधि में शामिल है तो जांच कर रहा विभाग गृह मंत्रालय से आदेश लेकर उस व्यक्ति का फोन टैप करा सकता है।

ऐसे मिलती है परमीशन

मान लीजिए कोई विभाग किसी मामले में जांच कर रहा है। उसे लगता है संदिग्ध व्यक्ति का फोन टैप करके जरूरी जानकारी हासिल की जा सकती है। इसके लिए उसे एक प्रपोजल तैयार करना पड़ता है। इसमें यह बताना पड़ता है कि वह किन कारणों से किसी व्यक्ति का फोन टैप करना चाहता है और इसमें कैसे उसे जांच में मदद मिलेगी। इस प्रपोजल को वह विचार के लिए गृह विभाग को भेज देता है। गृह विभाग इस पर विचार करता है और अगर उसे ठीक लगता है तो वह टैपिंग की परमीशन दे देता है। यदि उसे उचित नहीं लगता तो वह मना कर देता है। अगर जांचकर्ता को टैपिंग की परमीशन मिल जाती है तो वह जिस भी नेटवर्क का सिम यह कनेक्शन होता है उस नेटवर्क प्रोवाइडर कंपनी के पास जाकर परमीशन मिलने की जानकारी देकर फोन टैपिंग करते हैं।

समीक्षा भी

इसके अलावा गृह विभाग के सेक्रेट्री की परमीशन के बाद उसके निर्णय की समीक्षा के लिए भी कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में सेंट्रल के लिए समीक्षा के लिए कमेटी में एक कैबिनेट सेक्रेट्री, लॉ सेक्रेट्री और टेलीकम्यूनिकेशन सेक्रेट्री होगा। स्टेट लेवल कमेटी में चीफ सेक्रेट्री, लॉ सेक्रेट्री और सेक्रेट्री लेवल का एक व्यक्ति होगा। इन तीनों का काम टैपिंग पर दिए गए निर्णय की समीक्षा करना है।

फोन टैपिंग के मामले में यह भी रूल है कि किसी भी व्यक्ति का फोन एक बार परमीशन मिलने के बाद दो महीने तक टैप किया जाएगा। इसके बाद टाइम पीरियड बढ़ाने के लिए फिर से परमीशन लेनी होगी। किसी भी व्यक्ति का फोन अधिकतम 6 महीने ही टैप किया जा सकता है।

अगर शिकायत हो तो

बिना परमीशन फोन टैपिंग करना किसी व्यक्ति के मानवाधिकार का हनन करना है। इसके खिलाफ ह्यूमन राइट्स कमीशन में शिकायत हो सकती है। फोन-टैपिंग साबित होने पर इसके खिलाफ निकट के थाने में एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। व्यक्ति फोन टैपिंग के मामले में कंपनी के खिलाफ या फोन टैपिंग करने वाले के खिलाफ कोर्ट में केस हो सकता है। इससे यदि कोई क्षति हुई है तो कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

जारी हुई है गाइडलाइन

टेलीफोन टैपिंग के लिए 1885 में बने टेलिग्राफिक एक्ट के नियम बहुत लचीले थे। इसके मद्देनजर दिसंबर 1996 में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी नामक संस्था ने गवर्नमेंट के खिलाफ केस किया था, जिसमें कहा गया था कि इससे आम जन की प्राइवेसी भंग होने का खतरा रहता है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन जारी कर कोर्ट ने कहा कि यह साफ होना चाहिए की टैपिंग का उद्देश्य क्या है, कौन करेगा, मिली जानकारी किससे बाटेगा वगैरह।

ये होगी सजा

बिना परमीशन के अगर कोई व्यक्ति किसी का फोन टैप करता है या परमीशन के बाद कोई अफसर टैप की हुई बातों को किसी अनऑफिशियल व्यक्ति के साथ शेयर करता है तो उसे टेलीग्राफ एक्ट की धारा 26 के तहत दोषी पाया जाएगा। यह सजा तीन साल या जुर्माना या दोनों होगी। इस केस में दोषी को जमानत हो सकती है।

भारत में सिचुएशन

भारत में सेंट्रल और स्टेट दोनों सरकारों के पास फोन टैपिंग कराने का राइट है। इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट-1885 के सेक्शन-5 के तहत सरकार को फोन टैपिंग करने की परमीशन दी गई है। इस एक्ट में नियम 419 और 419 ए के तहत टेलीफोन टैपिंग के प्रॉसेस और टैपिंग की निगरानी का उल्लेख है। इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट में टेलीफोन टैपिंग के ऑर्डर की निगरानी करने के लिए एक कमेटी का भी प्रावधान है।

जर्मनी में

जर्मनी में दो या दो से अधिक व्यक्तियों की जानकारी के बगैर यदि फोन टैप किया जाता है तो इसे जर्मन क्रिमिनल कोड के तहत क्राइम माना जाएगा। जर्मनी में फोन टैपिंग के लिए लोकल जज से परमीशन लेनी पड़ती है। जर्मनी में बिना जानकारी के टैप किए हुए फोन को सबूत मान लेते हैं।

कनाडा में

कनाडा के नियम के अनुसार फोन पर बात कर रहे दो व्यक्ति में से किसी एक को टैपिंग की जानकारी होना जरूरी है।

फिनलैंड में

फिनलैंड में किसी व्यक्ति का फोन टैप होना कोई बहुत बड़ा इश्यू नहीं है। यहा किसी का फोन टैप करने पर उस टैपिंग की बातचीत से किसी की प्राइवेसी न भंग होती हो, कोई गोपनीय बात लीक न होती हो और यह सामान्य बातचीत हो तो इसके लिए टैप करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई कड़े नियम नहीं हैं।

गुरुवार, 29 अप्रैल 2010

कुत्तों में होती है इंसानी जज्बात की समझ


आपकी भावनाओं को आपका प्यारा कुत्ता बखूबी समझता है। न्यूजीलैंड के ओटागो विश्वविद्यालय में किए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।

विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 90 डनेडिन कुत्तों की जांच की। उन्हें हंसते हुए और रोते हुए बच्चो की तस्वीरें दिखाई गईं और उन्हें खुशी और कड़े भावाव्यक्ति वाले निर्देश दिए गए।

शोधकर्ता टेड रफमैन ने बताया कि कुत्तों की प्रतिक्रिया से ये संकेत मिले कि वे आनंद में डूबे व्यक्ति और गमगीन व्यक्ति के बीच के अंतर को एवं हंसी और रोने के फर्क को पहचान सकते हैं।

रफमैन ने कहा कि हम जानते हैं कि कुत्ते इंसानी हाव भाव को समझने में कुशल होते हैं। उन्होंने पाया कि कुत्तों को जच् बच्चे की रोने की आवाज आई तो वे टेलीविजन के पीछे उस नवजात शिशु के पास पहुंचे, उसके सर को सहलाया और अपना लगाव दिखाया।

उन्होंने कहा कि इससे लगता है कि वे इंसानी जज्बात को समझने में भी निपुण होते हैं |


अपनी राय जरूर दे इस विषय में ! मेरा खुद का अनुभव भी यही कहता हैं कि कुत्ते अपने मालिक कों बखूबी समझाते हैं | वह इस का बड़ी सटीक तरह से अंदाज लगा लेते हैं कि कब उनके मालिक का मूड ख़राब हैं और कब अच्छा !

डिहाइड्रेशन से रहें सावधान


गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में काफी पानी निकल जाता है। जिस पर ध्यान न देने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है। जब यह कमी स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, वही डिहाइड्रेशन कहलाता है।

पानी की कमी से सामान्य शारीरिक गतिविधियां गड़बड़ा जाती हैं। दरअसल, हमारे शरीर को सुचारू रूप से काम करने के लिए समुचित पानी की जरूरत होती है। लेकिन यह कैसे पता चले कि डिहाइड्रेशन का संकट सिर पर खड़ा है? आइए जानते हैं-

लक्षण :-

-अत्यधिक प्यास लगना।

-मुंह और होंठ सूखना।

-मूत्र विसर्जन पीले रंग का होना और उसमें दुर्गध आना।

-लगातार थकान महसूस होना।

-अत्यधिक ठंडा पसीना आना।

डिहाड्रेशन से कैसे बचें? :-

-कम से कम आठ गिलास पानी अवश्य पीएं। गर्मी ज्यादा लगे, तो पानी की मात्रा बढ़ाएं।

-अगर बीमार हैं या व्यायाम करते हैं, तो ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं।

-दूध पीएं।

-आरामदायक वस्त्र पहनें ताकि गर्मी न लगे।

-शर्करा युक्त पेय पदार्थ मसलन नींबू शर्बत, आईस टी ज्यादा न लें।

-अगर बीमार हैं, तो जल एवं सूप की अल्प मात्रा लगातार लेते रहें। भले ही भूख एवं प्यास न लगी हो।

-सब्जियां और फल खाएं।

-गर्मी या दस्त लगने की दशा में तत्काल डाक्टर से संपर्क करें।

बुधवार, 28 अप्रैल 2010

शुक्र है हमारे माननीय "जैसे" भी सही पर "ऐसे" नहीं !!


'


हमारे माननीय दूसरों से बेहतर हैं! शायद आपको विश्वास न हो क्योंकि आप उन्हें संसद में जोर-जोर से चिल्लाते, झगड़ते देखते हैं। लेकिन दूसरे देशों के सांसदों के व्यवहार को देखकर तो यही कहा जा सकता है कि गनीमत है। हमारे सांसद तो विधेयकों की प्रतियां फाड़ते हैं और सदन की कार्यवाही नहीं चलने देते। लेकिन विदेशी सांसद इनसे कहीं बढ़ कर हैं। जी हां, यूक्रेन की संसद में जो कुछ हुआ, उसके मुकाबले तो हमारे माननीय काफी 'अनुशासित' हैं।

मंगलवार को यूक्रेन के बंदरगाह शहर क्रिमिया में रूस की नौसेना को और अगले 25 वर्ष तक रखे जाने के समझौते को लेकर संसद में जो बहस शुरू हुई, वह शब्दों की बौछार से अंडों की बारिश में बदल गई। इसके बाद 'स्मोक बम' भी फेंका गया, जिससे पूरा सदन धुएं से भर गया।

हुआ यह कि समझौते के अनुमोदन के लिए जैसे ही संसद में मतदान शुरू हुआ, वैसे ही विपक्षी सदस्यों ने हंगामा आरंभ कर दिया। फिर कुछ सदस्यों ने नाराज होकर स्पीकर को निशाना बनाकर एक स्मोक बम और अंडे फेंके। स्पीकर के अंगरक्षकों ने तुरंत छतरी खोली और उन्होंने शरण ली। इसके बावजूद स्पीकर अपना कोट खराब होने से रोक नहीं सके!

जैसा मंगलवार को हुआ, वैसी ही अनुशासनहीनता यूरोप और एशिया के अन्य देशों की संसद में पहले भी देखी गई है। दक्षिण कोरिया, ताइवान, बोलीविया, तुर्की, यूनान जैसे देशों में ऐसी घटनाएं आम हैं। इसका इतिहास गवाह है।

अब अगर यह कहा जाये कि 'शुक्र है हमारे माननीय "जैसे" भी सही पर "ऐसे" नहीं ' तो क्या गलत होगा ?? आप ही बताये !!

मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

अब आयकर रिटर्न भरना और आसान


वित्तमंत्रालय ने सरल दो फार्म पेश किया है जिसे आयकर रिटर्न भरना आसान होने की संभावना है।

सरल-दो का उल्लेख वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने अपने बजट भाषण [2010-11] में किया था और यह दो पेज का है। फार्म को आयकर विभाग की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकता है |

वित्तमंत्रालय ने यह कदम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [सीएजी] की उस रिपोर्ट कों ध्यान में रखते हुए उठाया है जिस में यह बताया गया था कि देश में आधे से ज्यादा लोग पैन कार्ड बनवाने के बाद बटुए में सहेज कर रखते हैं। वे पैन कार्ड बनवाने के बाद भी आयकर रिटर्न दाखिल करने की जहमत नहीं उठाते।

आधिक जानकारी के लिए देखे :-

आधे से भी कम पैन धारक दाखिल करते हैं रिटर्न

नौसेना खरीदेगी नए लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर


नौसेना ने चेतक हेलीकाप्टरों के पुराने पड़ चुके बेड़े की जगह नए लाइट यूटिलिटी हेलीकाप्टर [एलयूएच] खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

नौसेना के अधिकारियों ने बताया कि हम करीब 30-35 साल पहले शामिल किए गए चेतक हेलीकाप्टरों की जगह आधुनिक डिजाइन और दो इंजन वाले हेलीकाप्टरों की तलाश कर रहे हैं। नौसेना ने इनके लिए हाल में ग्लोबल रिक्वेस्ट फार इनफारमेशन [आरएफआई] जारी किया है। विक्रेताओं से कहा गया है कि वे अपने उत्पादों का ब्योरा तीन हफ्ते के भीतर दें।

अगले कदम के तहत यूरोपियन कंसोर्टियम यूरोकाप्टर, इटैलियन अगुस्टा वेस्टलैंड और रशियन कामोव जैसे हेलीकाप्टर बनाने वाली अग्रणी कंपनियों को इस साल के मध्य तक ग्लोबल रिक्वैस्ट फार प्रपोजल [आरएफपी] जारी किए जाने की उम्मीद है।

ये कंपनियां पहले ही सेना और वायुसेना के फ्रांसीसी मूल वाले चीता [चेतक] बेड़े की जगह 197 एलयूएच की आपूर्ति हेतु 60 करोड़ अमेरिकी डालर के फील्ड परीक्षण में हिस्सा ले रही हैं। सेना और वायुसेना को अगले दशक में 384 एलयूएच मिलेंगे जिनमें से 197 विदेशी कंपनियों से खरीदे जाएंगे, जबकि शेष हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड द्वारा स्वदेश में निर्मित होंगे।

आरएफआई के तहत नौसेना चाहती है कि कि ऐसे हेलीकाप्टर उसके पास हों जिन्हें दो पायलट उड़ा सकें और साथ ही केवल एक पायलट भी उसके लिए पर्याप्त हो।

अधिकारियों ने बताया कि नए हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल तलाशी एवं बचाव कार्य, हताहतों को निकालने, निगरानी तथा सीमित खुफिया जानकारी जुटाने के लिए किया जाएगा। हेलीकाप्टरों में आतंकवाद और समुद्री डकैती रोधी क्षमता के अलावा पनडुब्बियों को निशाना बनाने की काबिलियत भी होनी चाहिए। नौसेना समुद्र के उपर उड़ते वक्त बेहतर निगरानी के लिए दो इंजन वाले हेलीकाप्टर चाहती है।

हेलीकाप्टरों का इस्तेमाल समुद्र और समुद्र तट से बाहर दोनों जगहों के लिए किया जा सकेगा और वे छोटे से डैक से लेकर बडे डैक [विमान वाहक जहाज] से उडान भर सकेंगे। प्रतिकूल मौसम में दिन रात बर्फीली, जल, बालू और सतह कहीं से भी उनका परिचालन किया जा सकेगा।

सोमवार, 26 अप्रैल 2010

सिर के इशारे पर काम करेगा कंप्यूटर


कंप्यूटर में माउस बिना काम करना असहज बन जाता है। लेकिन जो लोग किसी दुर्घटनावश अपने हाथ या उंगली गवां देते हैं उनके लिए कंप्यूटर पर काम करना सहज नहीं होता। लेकिन, नालेज पार्क के स्काई लाइन कालेज के दो छात्रों की एक रिसर्च ने हाथ से विकलांग लोगों के लिए बिना माउस कंप्यूटर के उपयोग को सहज बना दिया है। ऐसे लोग अपने सिर व आंखों की मदद से कंप्यूटर के कर्सर को कंट्रोल कर सकेंगे।

इस रिसर्च को अंजाम दिया है बीटेक कंप्यूटर साइंस के अंतिम वर्ष के छात्र अतुल राय व अखिलेश अग्रवाल ने। अतुल व अखिलेश की इस रिसर्च को फ्रांस में आईपीटीए 10 कांफ्रेस में भेजा गया था। जहां इंस्टीटयूट आफ इलेक्ट्रीकल एंड इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के प्रोफेसर ने उसे सराहा है। अतुल पांच जुलाई को फ्रांस में रिसर्च पेपर पेश करेगा।

माउस की जगह इस तरह काम करेगा सिर

पहले वेब कैम की मदद से उपयोग करने वाले व्यक्ति के चेहरे को कंप्यूटर पहचानेगा। कंप्यूटर यह कार्य लूकस कानाडे विधि की मदद से करेगा। ब्लोब फिल्टर से उपयोग करने वाले व्यक्ति का चेहरा कंप्यूटर की मेमोरी में फीड हो जाएगा। इसके बाद कंप्यूटर उसी व्यक्ति के सिर को माउस की तरह उपयोग करेगा। आटिकल फ्लो की मदद से चेहरे की गतिविधि के अनुरूप माउस काम करेगा।

अगर व्यक्ति का सिर दायीं गति करेगा तो कंप्यूटर के स्क्रीन पर कर्सर दाई ओर होगा। क्लिक का काम पलकों की मदद से होगा।

अतुल अखिलेश कों हम सब की ओर से बहुत बहुत शुभकामनाएं !


एलियंस हैं, लेकिन संपर्क की कोशिश न करें !!


क्या इंसानों के अलावा भी अंतरिक्ष में जीवन है? जी हां है। यह मानना है दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक और विचारक स्टीफन हाकिंग का। लेकिन साथ ही वह यह भी कहते हैं कि मनुष्यों को एलियंस [अंतरिक्ष जीव] के साथ संपर्क करने की कोशिश नहीं करना चाहिए।

'डिस्कवरी' चैनल द्वारा बनाई गई एक डाक्युमेंट्री में हाकिंग ने कहा कि नि:संदेह एलियंस हैं। इस डाक्युमेंट्री में हाकिंग ने ब्रह्मांड के कई रहस्यों पर से परदा उठाया है।

संडे टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार हाकिंग इस बात के प्रति आश्वस्त हैं कि एलियंस हैं। खास बात यह कि वह सिर्फ ग्रहों पर ही अंतरिक्ष जीवों की संभावना को नहीं स्वीकारते, बल्कि सितारों और अंतरिक्ष में दो ग्रहों के बीच विस्तृत खाली आकाश में भी इनकी मौजूदगी बताते हैं।

अंतरिक्ष में जीवन को लेकर हाकिंग का तर्क बहुत सरल है। वह कहते हैं कि करीब सौ अरब आकाशगंगाएं हैं और उनमें खरबों सितारे हैं। ऐसी स्थिति में सिर्फ पृथ्वी ग्रह पर ही जीवन हो, यह संभव नहीं हो सकता।

68 वर्षीय हाकिंग कहते हैं, 'गणितीय आधार पर विचार करने वाले मेरे मस्तिष्क में एलियंस के होने का खयाल बहुत स्पष्ट है। हमारे सामने असली चुनौती यह जानना है कि आखिर एलियंस हैं कैसे?'

इसका जवाब भी वैसे हाकिंग देते हैं। उनके अनुसार ये जीव मुख्य रूप से अत्यंत सूक्ष्म [माइक्रोब्स] या फिर सीधे-सादे पशु हो सकते हैं। इनमें अधिकांश पृथ्वी के इतिहास में मिलने वाले जीवों की तरह होंगे। डाक्युमेंट्री में इन अंतरिक्ष जीवों को दो पैरों वाले शाकाहारी के रूप में दिखाया गया है, जिन्हें पीले छिपकली जैसे उड़ने वाले जीव लपक लेते हैं। एक अन्य दृश्य में समुद्र में रहने वाले चमकदार फ्लोरोसेंट रंगों के जीव में दर्शाया गया है।

यद्यपि यह काल्पनिक है, परंतु हाकिंग ने इनके माध्यम से एक गंभीर बात कही है। उनके अनुसार कुछ अंतरिक्ष जीव अत्यधिक बुद्धिमान हो सकते हैं और मनुष्यों के लिए खतरा बन सकते हैं। उनका मानना है कि ऐसे जीवों के साथ संपर्क मानव सभ्यता पर संकट ला सकता है। वह कहते हैं कि ऐसे जीव पृथ्वी पर हमला करके यहां के संसाधनों पर कब्जा कर सकते हैं।

हाकिंग की मानें, तो हमें सिर्फ अपनी सभ्यता पर ध्यान देना चाहिए। वह कहते हैं, 'मैं कल्पना करता हूं कि वे [एलियंस] बड़े-बड़े अंतरिक्ष यानों में हैं और अपने ग्रह के सारे संसाधनों का उपभोग कर चुके हैं। ऐसे जीव खानाबदोश बन कर दूसरे ग्रहों की तलाश में हो सकते हैं और उन्हें जीत कर अपना घर बना सकते हैं।'

रविवार, 25 अप्रैल 2010

मंद पड़ रही आडियो कैसेट की धुन


संगीत का लुत्फ लेने के लिए पहले लोग कैसेट खरीदते थे। लेकिन अब उनकी लोकप्रियता लगभग समाप्त हो चुकी है। कैसेट की जगह एमपीथ्री के रूप में आने वाली सीडी ने ले ली है। फायदा यह कि एक सीडी में कैसेट की तुलना में कहीं अधिक गाने आते है।

संगीत के क्षेत्र में आई इस क्रांति ने आडियो कैसेट की दुनिया को लगभग खत्म कर दिया है। ऐसा सिर्फ भारत में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2005 में दुनिया भर में 90 करोड़ कैसेट बिके थे। यह संगीत के क्षेत्र में 54 फीसदी हिस्सेदारी थी। फिर लगातार इसमें गिरावट आती गई। आज आडियो कैसेट या तो बनते नहीं है या फिर संगीत स्टोर में धूल फांकते रहते है।

देश की सबसे बड़ी म्यूजिक कंपनी टी-सीरीज के प्रबंध निदेशक भूषण कुमार का कहना है, 'कैसेट व्यवसाय लगभग खत्म हो चुका है। अब तो लोग इसके बारे में बात भी नहीं करना चाहते।' टिप्स के कुमार तौरानी भी भूषण से सहमत है। वह कहते है, 'कुछ साल पहले तक हम हर साल 4.5 करोड़ कैसेट जारी किया करते थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 लाख रह गई है।'

रिटेल चेन 'प्लेनेट एम' के प्रवक्ता के मुताबिक आडियो कैसेटों को रखने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत होती है जबकि उतनी जगह में तीन सीडी आराम से आ जाती हैं। बड़े शहरों में लोग लोग इंटरनेट रेडियो, आई-पाड और आन लाइन संगीत का लुत्फ उठा रहे है। आडियो कैसेट लांग प्लेइंग रिका‌र्ड्स [एलपी] की तरह बीते दिनों की बात होते जा रहे है। आलम यह है कि बड़े संगीत स्टोर आडियो कैसेट रखते भी नहीं है। यही कारण है कि कैसेट बनाने वाली कंपनियों ने भी इसका उत्पादन कम कर दिया है।

शब्दों को पिरो दिलों को जोड़ने का प्रयास


जब देश में भाषा व क्षेत्र के नाम पर अलगाववाद की राजनीति कर एकता व अखंडता को क्षति पहुंचाई जा रही हो ऐसे में 95 भाषाओं के शब्दों को एक माला में पिरोना निश्चित ही सराहनीय प्रयास है। यह प्रयास किया है हिंदी के प्रोफेसर राजेंद्र प्रसाद सिंह ने। यह प्रयास भाषाओं ही नहीं बल्कि दिलों को भी जोड़ रहा है।

भाषा विद्वानों के अनुसार अब तक 16 भाषाओं का समेकित शब्द कोष ही उपलब्ध है। वर्ष 1961 में विश्वनाथ दिनकर नरवणे ने 'भारतीय व्यवहार कोष' संपादित किया था। केंद्रीय हिंदी निदेशालय आगरा की ओर से अधिकतम 14 भाषाओं का समेकित शब्द कोष निर्माण किया गया था।

डा राजेंद्र ने अंग्रेजी से लेकर झारखंड के सिंहभूमि की जनजातियों की भाषा 'हो' का भी शब्द संग्रह किया है। कोष में 11 विदेशी [चीनी, चेक, जर्मन, नेपाली, जापानी, फ्रांसीसी, अरबी, वर्मी, रूसी, स्पेनी, इंडोनेशियाई] भाषाओं के साथ चड संयुक्त राष्ट्र, 22 भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची व 17 हिंदी की बोलियों को भी शामिल किया है।

समाहित की गयीं 95 भाषाओं में अंगामी, अंग्रेजी, अरबी, अवधि, असमिया, आदी, आपातानी, इंडोनेशियाई, इदू, उड़िया, उर्दू, एनाल, कन्नौजी, कन्नड, कर्बी, कश्मीरी, काबुई, कुर्की, कुडुख, कुमाऊनी, कोंकणी, कोन्यक, कौरवी, खासी, खेजा, गाइते, गारो, गुजराती, गोंडी, चकमा, चांग, चीनी, चेक, छत्तीसगढ़ी, जर्मन, जापानी, जेलियांग, डोगरी, तमिल, तरांव, तांगखुल, तेलुगू, त्रिपुरी, दिमासा, नागामी, निमाड़ी, निर्शा, नेपाली, नोक्ते, पंजाबी, पाइते, पालि, पोचुरी, प्राकृत, फ्रांसीसी, फारसी, फोम, बंगला, बघेली, बर्मी, बुंदेली, बोडो, ब्रजभाषा, भोजपुरी, भोटी, मगही, मणिपुरी, मराठी, मरिंग, मलयालम, माओ, मिजो, मिरी, मुंडारी, मेम्बा, मैथिली, थिमचुंगर, राजस्थानी, रियांग, रूसी, रेगमा, लिम्बु, लोचा, लोथा, वाइफे, संथाली, संस्कृत, सांगतम, सिंधी, सिंहली, सिम्ते, स्पेनी, हमार, हिंदी व हो को शामिल हैं। कोष में फिलहाल 7695 शब्द हैं।

स्थानीय शांति प्रसाद जैन कालेज के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के प्रोफेसर डा सिंह के अनुसार समेकित पर्याय शब्दकोष की कच्ची रूपरेखा में भाषाओं की संख्या 16 थी, फिर 34 हुई, बाद में 44, उसके बाद 77 और अब 95 हो गई है।

उनका कहना है कि कौन सी भाषा का कोष ग्रंथ कहां से प्रकाशित हुआ है, इसे पता करना मुश्किल था। कुछ भाषाएं ऐसी भी हैं, जिनके कोष ग्रंथ तैयार नहीं हैं। मिसाल के तौर पर छत्तीसगढ़ी, अवधि, बघेली, कन्नौजी, निमाड़ी, ब्रजभाषा व बंगला आदि। कोंकणी और डोगरी के लिए भी काफी परेशानी हुई। बहुत से शब्दों का पर्याय सभी भाषाओं में न होने से सर्वनिष्ठ शब्दों को ही शब्द कोष में शामिल किया गया है।

उदाहरण के लिए इस शब्द कोष में रोटी शब्द नहीं है। क्योंकि जापानी भाषा में यह कनसेप्ट नहीं है। समानांतर कोष, शब्देश्वरी, पेंगुइन इंग्लिश-हिन्दी, व हिंन्दी-इंग्लिश थिसा रस एंड डिक्शनरी के संपादक डा अरविंद कुमार मानते हैं कि शब्दकोष का निर्माण कार्य 'टीम वर्क' के बिना संभव नहीं है। कुमार इसे सशक्त शुरुआत मानते हैं। इससे पहले डा सिंह भोजपुरी व्याकरण, शब्द कोष और अनुवाद की समस्या, भाषा का समाजशास्त्र, भारत में नाग परिवार की भाषाएं, भोजपुरी भाषा शास्त्र, दलित साहित्य की रचना कर चुके हैं।


रिपोर्ट :- सतीश कुमार

कौन करेगा आईपीएल थ्री के ताज पर राज?


विवादों के दलदल में फंसा इंडियन प्रीमियर लीग अपने तीसरे सत्र के ग्रैंड क्रिकेट फिनाले के लिए तैयार है। इस ग्रैंड फिनाले में मुंबई के डी वाई पाटिल स्टेडियम पर सचिन की मुंबई इंडियंस के सामने धौनी के सुपर किंग्स होंगे।

मुंबई इंडियंस सचिन की फिटनेस को लेकर काफी चिंतित है तो वहीं चेन्नई सुपर किंग्स दूसरी बार फाइनल में पहुंच कर खिताब जीतने का हर संभव प्रयास करेगी। आईपीएल और विवाद का इस टी-20 लीग के जन्म से ही गहरा नाता रहा है लेकिन इस बार संकट काफी गहरा गया है क्योंकि इस बार काले धन से लेकर सट्टेबाजी और मैच फिक्सिंग के आरोप आईपीएल को जकड़ते हुए दिख रहे हैं।

आईपीएल आयुक्त ललित मोदी चारों तरफ से घिरे हैं और उन पर अपना पद छोड़ने के लिए दबाव बढ़ रहा है। लेकिन इन सबके बीच आखिरी किले पर फतह हासिल करने के लिए मैदान सज चुका है। मुंबई इंडियंस के कप्तान तेंदुलकर चोटिल हैं और टीम अब भी यह कहने की स्थिति में नहीं है कि वह फाइनल तक फिट हो पाएंगे या नहीं। तेंदुलकर के दाएं हाथ में चोट ऐसे समय में लगी है जब मुंबई इंडियंस पहली बार आईपीएल फाइनल खेल रहा है।

सचिन तेंदुलकर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूर के खिलाफ पहले सेमीफाइनल के दौरान चोटिल हो गए थे। उनकी उपलब्धता को लेकर बाद में घोषणा की जाएगी लेकिन यदि वह मैच से बाहर बैठते हैं तो यह मुंबई की तीन साल में पहली बार खिताब जीतने की संभावनाओं के लिए करारा झटका होगा। तेंदुलकर बेहतरीन फार्म में चल रहे हैं और उन्हें टूर्नामेंट में अब तक 570 रन बनाने के लिए शुक्रवार रात आईपीएल पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज भी चुना गया।

इस दिग्गज बल्लेबाज ने हालांकि आगे बढ़कर नेतृत्व किया लेकिन टीम के अन्य खिलाड़ियों ने भी मुंबई को फाइनल में पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। जिन अन्य खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया है उनमें सौरभ तिवारी ने हर मौके का फायदा उठाया तो अंबाती रायूडु ने विकेट के आगे और विकेट के पीछे दोनों भूमिकाओं में प्रभावित किया। वेस्टइंडीज के बिग हिटर कीरोन पोलार्ड ने भी टीम को कई बार संकट से उबारा है।

तेंदुलकर की मास्टरी से मिले मजबूत आधार को अगर तिवारी और रायूडु ने आगे बढ़ाया तो पोलार्ड ने डेथ ओवरों में चौकों और छक्कों की बौछार करके स्कोर को नए मुकाम पर पहुंचाने में मदद की। पोलार्ड ने पिछले दो मैच में दिल्ली डेयर डेविल्स के खिलाफ 13 गेंद पर नाबाद 45 रन और रायल चैलेंजर्स के खिलाफ इतनी ही गेंद पर नाबाद 33 रन बनाकर पासा पलटने में देर नहीं लगाई थी।

मुंबई को आशा है कि फाइनल में अन्य बल्लेबाज खासकर सनथ जयसूर्या भी महत्वपूर्ण पारी खेलें। अगर तेंदुलकर फिट नहीं होते हैं तो फिर जयसूर्या का खेलना तय है। मुंबई की गेंदबाजी भी काफी मजबूत है और उसके पांच में से तीन गेंदबाज बहुत अच्छी भूमिका निभा रहे हैं। लेसिथ मलिंगा का शुरुआत और अंत में कोई जवाब नहीं जबकि हरभजन सिंह ने बीच के ओवरों में बल्लेबाजों को अधिक मौके नहीं दिए। इसके अलावा मुंबई को घरेलू दर्शकों के सामने खेलने का भी लाभ मिलेगा।

जहां तक चेन्नई सुपर किंग्स का सवाल है तो वह मैथ्यू हेडन की फार्म को लेकर काफी चिंतित होगा। सुरेश रैना, मुरली विजय और एस बद्रीनाथ ने हालांकि अच्छी पारियां खेली हैं और यदि कप्तान धोनी भी फार्म में लौट आते हैं तो यह उनके लिए खुशी की बात होगी। आस्ट्रेलियाई डग बोलिंगर को छोड़कर चेन्नई के तेज गेंदबाज खास प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। टीम पावरप्ले में आफ स्पिनर आर अश्विन पर निर्भर है जिन्होंने इस दौरान हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया।

सुपर किंग्स ने सेमीफाइनल में पिछले साल के विजेता डक्कन चार्जर्स के खिलाफ तीन स्पिनर अश्विन, शादाब जकाती और मुथैया मुरलीधरन को उतारा था। विकेट से टर्न मिल रहा है और जिस तरह से चेन्नई के तेज गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं वैसे में वह फाइनल में भी तीन स्पिनरों के साथ उतर सकता है।

शनिवार, 24 अप्रैल 2010

आधे से भी कम पैन धारक दाखिल करते हैं रिटर्न


देश में आधे से ज्यादा लोग पैन कार्ड बनवाने के बाद बटुए में सहेज कर रखते हैं। वे पैन कार्ड बनवाने के बाद भी आयकर रिटर्न दाखिल करने की जहमत नहीं उठाते। वर्ष 2008-09 देश में में 8.08 करोड़ पैन कार्डधारक थे। इनमें केवल 3.26 करोड़ ने ही अपना आयकर रिटर्न दाखिल किया। बाकी 4.82 करोड़ ने इसकी जरूरत नहीं समझी।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक [सीएजी] ने इस गड़बड़ी की ओर इशारा करते हुए आयकर विभाग से कहा है कि वह इसका पता लगाए। शुक्रवार को सीएजी की रिपोर्ट संसद में पेश की गई। रिपोर्ट के बारे में डिप्टी सीएजी डा. एके बनर्जी ने संवाददाताओं को बताया कि वर्ष 2008-09 में प्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या में तीन प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। हालांकि इससे पहले वित्त वर्ष में इसमें 7.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ था। चिंता की बात यह है कि कारपोरेट क्षेत्र में टैक्स जमा कराने वालों की संख्या में तेजी से कमी आई है। रिपोर्ट में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड [सीबीडीटी] से इस बारे में पता लगाने के लिए कहा गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वित्त वर्षो में करदाताओं के आधार में 20.2 फीसदी की दर से वृद्धि हुई है। वर्ष 2004-05 में देश में 2.71 करोड़ करदाता थे, जो 2008-09 में बढ़कर 3.26 करोड़ हो गए। वर्ष 2006-07 के मुकाबले 2007-08 में करदाताओं की संख्या में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वहीं वर्ष 2007-08 की तुलना में 2008-09 में इसमें तीन प्रतिशत की गिरावट आ गई।

37 साल के हुए क्रिकेट के भगवान


भारत के स्टार बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर शनिवार को 37 वर्ष के हो गए और उन्हें शुक्रवार रात इस जन्मदिन का सबसे बड़ा तोहफा इंडियन प्रीमियर लीग के पुरस्कार समारोह में मिला, जिसमें 'मास्टर ब्लास्टर' को सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज से नवाजा गया।

भारतीय क्रिकेट हालांकि इन दिनों सबसे बड़े संकट 'आईपीएल विवाद' से जूझ रहा है, जिसके कम होने का कोई आसार नहीं दिखता। जन्मदिन से एक दिन पहले आईपीएल तीन का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज चुने जाने से बेहतरीन तोहफा तेंदुलकर के लिए और कुछ नहीं हो सकता था। तेंदुलकर ने हालांकि इस जन्मदिन के जश्न को स्थगित कर दिया है क्योंकि अभी उनकी टीम को रविवार को आईपीएल का फाइनल खेलना है।

वह इस बार टूर्नामेंट में शानदार फार्म में हैं और उन्होंने अब तक 14 मैच में 570 रन बनाए हैं, जिसमें पांच अर्धशतक शामिल हैं।


हम सब की ओर से सचिन कों जन्मदिन की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं !

नौसेना के जहाजी बेड़े की ताकत बढे़गी


लंबे इंतजार के बाद भारतीय नौसेना को इस महीने के अंत तक देसी डिजाइन और स्वदेशी निर्माण क्षमता के सहारे तैयार युद्धपोत आईएनएस शिवालिक मिल सकता है। दुश्मन के राडारों को चकमा देने में सक्षम यह युद्धपोत न केवल अत्याधुनिक लड़ाकू क्षमताओं से लैस है बल्कि भारतीय युद्धपोत डिजाइन क्षमताओं की भी नई मिसाल है।

नौसेना डिजाइन महानिदेशक रियर एडमिरल केएन वैद्यनाथन के अनुसार, स्टील्थ [राडार को चकमा देने वाले] श्रेणी के इस जहाज को रक्षा मंत्री एके एंटनी 29 अप्रैल को मझगांव डाक में देश को समर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों और तकनीक से लैस यह पोत न केवल अपनी इन्फ्रारेड पहचान छुपाने में सक्षम है बल्कि ध्वनि तरंगों के सहारे भी इसे पकड़ना मुश्किल है। दुश्मन को चकमा देने के लिए 143 मीटर लंबे और छह हजार टन वजनी इस जहाज की सतह पर राडार एब्जार्बेट पेंट किया गया है।

लंबे समय तक पानी में रहने की क्षमता से लैस आईएनएस शिवालिक में कोडाग यानी गैस और डीजल इंजन की सम्मिलित क्षमता दी गई है। वहीं दुश्मन के खतरे से निपटने के लिए इसमें हवा, सतह और पानी के नीचे से होने वाले हमलों के खिलाफ हिफाजत के पुख्ता इंतजाम हैं। इसके लिए पोत में जहां उच्च क्षमता वाले राडार लगे हैं वहीं लंबी दूरी तक मार करने वाली तोप और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी लगाई गई हैं।

वैद्यनाथन के अनुसार जहाज में लगा कम्बेट मैनेजमेंट सुइट एक साथ कई खतरों का मुकाबला करने में सक्षम है। काफी समय तक पानी में रहने की क्षमताओं से लैस शिवालिक में नाविकों के लिए माड्यूलर अकोमोडेशन के अलावा माड्यूलर किचन की सुविधा भी है। साथ ही भारतीय नाविकों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए इसमें रोटी मेकर भी लगाया गया है।

वैद्यनाथन के मुताबिक पोत का डिजाइन 250 कर्मियों की जरूरतों और आराम को देखते हुए बनाया गया है। नौसेना मुख्यालय के अनुसार तीन युद्धपोतों की शिवालिक श्रृंखला के अन्य जहाज आईएनएस सतपुड़ा नवंबर 2010 और आईएनएस सह्यंाद्रि अगले साल के मध्य तक जहाजी बेड़े का हिस्सा बनेंगे। शिवालिक की नौसेना में कमीशनिंग दो बार टल चुकी हैं। पहले इसके नौसेना में शामिल होने के लिए 2009 का समय रखा गया था। बाद में इस साल फरवरी की समय-सीमा तय की गई।

उल्लेखनीय है कि नौसेना इन दिनों स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत के निर्माण पर भी काम कर रही है। शिवालिक की डिजाइन को अधिक उन्नत बनाते हुए सात जहाजों का नया बेड़ा बनाने की भी तैयारी है। सूत्रों के मुताबिक इस डिजाइन परियोजना का नाम 17ए रखा गया है। इसके अलावा कोलकाता श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट का निर्माण भी अंतिम चरण में है।

ब्रह्मोस से लैस होगा सुखोई लड़ाकू विमान


भारतीय वायुसेना रूस में निर्मित 40 सुखोई लड़ाकू विमानों को ब्रह्मोस मिसाइल से लैस करेगी। यह जानकारी एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।

डिफेंस सर्विसिज एशिया [डीएसए]-2010 प्रदर्शनी के दौरान बुधवार को ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख सिवाथानू पिल्लै ने कहा कि मिसाइलों से लैस हो जाने के बाद भारत के एसयू-30 एमकेआई फ्लैंकर-एच लड़ाकू विमानों का बेड़ा निश्चित रूप से अनूठा हो जाएगा।

ब्रह्मोस मिसाइल की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। भारतीय-रूसी संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस की स्थापना 1998 में हुई थी। इसके द्वारा निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल का समुद्र और जमीन में मार करने का सफलता पूर्वक परीक्षण हो चुका है। इसे सेना और नौसेना के बेड़े में शामिल किया जा चुका है।

बड़े काम की है झपकी


नींद और ख्वाब का पुराना रिश्ता है और इसमें एक नया पहलू जोड़ते हुए वैज्ञानिकों ने झपकी और सपने के बीच एक अनोखे संबंध का पता लगाया है।

हारवर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के मुताबिक झपकी से ऐन पहले देखे गए काम के बारे में ख्वाब देखने से जागने के बाद वह कार्य और बेहतर ढंग से होता है। वहीं, ऐसा नहीं करने वाले या झपकी के दौरान काम से जुड़ा सपना नहीं देखने वाले लोग अपेक्षाकृत कम च्च्छा प्रदर्शन कर पाते हैं। इस अध्ययन में शामिल किए गए लोगों को कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठकर थ्री-डी पहेली सुलझाने को कहा गया था। पहेली में उनसे एक पेड़ ढूंढने को कहा गया था।

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता रॉबर्ट स्टिकगोल्ड ने कहा कि उनमें से जिन लोगों को झपकी लेने की इजाजत दी गई और जिन्होंने पहेली से जुड़ा ख्वाब देखा, उन्होंने कम वक्त में ही पहेली सुलझा ली। उन्होंने कहा कि सपनों के अध्ययन से जाहिर होता है कि दिमाग एक ही समस्या के बारे में कई स्तरों पर सोचता है।

शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010

एक माइक्रो पोस्ट :- मुझे जीने दो !!

मैं ना हिन्दू ना मुसलमान ; मुझे जीने दो !
दोस्ती है मेरा ईमान ; मुझे जीने दो !
कोई एहेसान ना करो मुझ पे तो एहेसान होगा;
बस इतना करो एहेसान , मुझे जीने दो !
ना मैं लेखक ना कवि ; ना बनना मुझे ब्लॉगर महान ;
मुझे जीने दो !!

सूर्य की हैरतअंगेज तस्वीरें मिलीं


अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने सूर्य की कुछ दंग कर देने वाली तस्वीरें जारी की हैं। इससे पहले सूर्य की ऐसी तस्वीरें नहीं मिली थीं। कुछ तस्वीरों में सूर्य से बहकर बाहर आता तरल पदार्थ दिखाई दे रहा है जबकि अन्य तस्वीरों में सूर्य की सतह के अत्यंत करीब होने वाली गतिविधियां दिखती हैं।

सूर्य की ये तस्वीरें नासा द्वारा हाल ही में अंतरिक्ष में भेजी गई सौर गतिशील वेधशाला सोलर डाइनेमिक्स आब्जरवेटरी [एसडीओ] ने उतारी हैं। नासा ने अपने इस अभियान को 'लिविंग विद ए स्टार प्रोग्राम' [एलडब्ल्यूएस] नाम दिया है। सूर्य और अंतरिक्ष के पर्यावरण के अध्ययन के लिए नासा द्वारा संचालित कई अभियानों में यह भी एक है।

वाशिंगटन स्थित नासा मुख्यालय के हेलियोफिजिक्स विभाग के निदेशक रिचर्ड फिशर ने कहा, 'इन शुरुआती तस्वीरों से सूर्य की गतिशीलता का पता चलता है। ऐसा मैंने पिछले 40 वर्षो से अधिक समय से जारी सूर्य से संबंधित शोध के दौरान नहीं देखा था।' एसडीओ प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक डीन पेसनेल ने भी कहा कि इन आश्चर्यजनक तस्वीरों से हमारे गतिशील सूर्य के बारे में नई जानकारी मिली है। वास्तव में यह सूर्य को समझने में एडीओ के योगदान की शुरुआत भर है।

नासा के एलडब्ल्यूएस कार्यक्रम का मकसद सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के जुड़ाव के उन पहलुओं के बारे में वैज्ञानिक समझ विकसित करना है जिससे हमारा जीवन सीधे तौर पर प्रभावित होता है। फिशर ने कहा, 'एसडीओ सूर्य और उसकी प्रक्रियाओं के बारे में हमारी समझ को बदल देगा। इस अभियान का विज्ञान पर बहुत प्रभाव पड़ेगा। ठीक उसी तरह जैसा आधुनिक खगोल भौतिकी में हबल अंतरिक्ष टेलीस्कोप का पड़ा है।'

दुर्गम इलाकों से सस्ते में बात कर सकेंगे जवान


दूरदराज के इलाकों में तैनात अ‌र्द्धसैनिक बलों के जवानों को परिवार वालों से बात करने के लिए ने तो दूर जाना होगा और न ही ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। वे अब सेटेलाइट फोन से घर वालों से बात कर सकेंगे, वह भी एक रुपया प्रति मिनट में। अ‌र्द्धसैनिक बलों के लिए यह सुविधा गृह मंत्रालय के कहने पर बीएसएनएल ने दी है। इसके लिए 400 दुर्गम इलाकों में सेटेलाइट फोन लगाए जा चुके हैं, जबकि बीएसएफ और आईटीबीपी के जवानों के लिए अलग से 288 सेटेलाइट फोन लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

दूरदराज के इलाकों में तैनात अ‌र्द्धसैनिक बल के जवानों को परिवार वालों से बात करने के लिए मीलों चल कर शहर के पीसीओ तक जाना पड़ता था। जवानों की परेशानी को देखते हुए गृह मंत्रालय ने भारत संचार निगम लिमिटेड को टेलीफोन सुविधा उपलब्ध कराने को कहा था। बीएसएनएल ने सेटेलाइट फोन तो लगा दिए, लेकिन वह इसके लिए जवानों से पांच रुपये प्रति मिनट की दर से पैसा लेता था, जिसे गृह मंत्रालय के कहने पर अब एक रुपया प्रति मिनट कर दिया गया है।

गुरुवार, 22 अप्रैल 2010

महंगी पड़ेगी चेक में चूक


चेक काटने जा रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। अब चेक भरने में की गई मामूली चूक से भी यह बाउंस हो जाएगा। इसका आपको दोतरफा नुकसान उठाना होगा। इससे न केवल आपको उस बैंक को पेनाल्टी भरनी होगी जिसका चेक जारी किया जा रहा है, बल्कि उसे भी जिसके लिए चेक जारी किया जा रहा है। कहीं वह पार्टी जिसे चेक इश्यू किया गया है, कानूनी कार्रवाई पर उतर आई तो कोर्ट कचहरी के चक्कर से भी कोई नहीं बचा सकता।

भारतीय रिजर्व बैंक ने 22 फरवरी, 2010 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसके मुताबिक यदि चेक में तारीख के अलावा कोई दूसरा बदलाव किया जाता है तो उस दशा में ग्राहकों को नया चेक इश्यू करना होगा। अब चाहे आपको चेक पर नाम में संशोधन करना हो या फिर इसमें भरी गई राशि में बदलाव करना हो। फिलहाल इन दिशानिर्देशों को लागू करने की कोई अंतिम तारीख तय नहीं की गई है, पर एचडीएफसी बैंक समेत कुछ बैंक इन्हें 1 जुलाई, 10 से लागू कर रहे हैं।

साफ है कि आरबीआई के इस सर्कुलर के नियमों को अगर अमली जामा पहनाया गया, तो निश्चित ही चेक बाउंस के मामले भी बढ़ेंगे। वैसे केंद्रीय बैंक का तर्क है कि नए नियमों से चेक में धोखाधड़ी के मामलों में गिरावट आएगी। चूंकि इन दिशानिर्देशों से बड़ी संख्या में ग्राहक प्रभावित होंगे, लिहाजा बैंकों ने इनकी जानकारी भी देनी शुरू कर दी है। एचडीएफसी बैंक ने कहा है कि वह जून, 2010 के अंत तक इस बारे में ग्राहकों को सूचित करता रहेगा। बैंकों ने इस जानकारी को अपने नोटिस बोर्ड पर भी चस्पा कर रखा है।

काउंटर साइन के संबंध में भी ये नियम लागू होंगे। आमतौर पर चेक इश्यू करने वाले व्यक्ति से चेक भरने में कोई गलती हो जाती है और वह उसे दोबारा हस्ताक्षर (काउंटर साइन) कर इश्यू कर देता है, तो बैंक उस चेक को क्लियर कर देते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा।

अभी बैंक मामूली गलतियां होने पर चेक क्लियर कर देते हैं, पर आगे से इसकी गुंजायश बिल्कुल खत्म हो जाएगी। बैंकों का कहना है कि नए दिशा-निर्देशों के लागू होने के बाद कोई भी क्लीयरिंग शाखा यह जोखिम नहीं उठाएगी।

आरबीआई को वैसे तो नए नियमों से काफी उम्मीद है कि इससे चेक में हेराफेरी के मामलों में कमी आएगी, पर बैंकों के कुछ अधिकारियों को इसमें संदेह है। बैंक आफ इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चेक में फेरबदल के कारण ही केवल हेराफेरी नहीं होती। कुछ लोग तो नकली चेक बना लेते हैं। उसके लिए क्या करेंगे? हालांकि केंद्रीय बैंक ने इसके लिए भी इंताजाम किया है। धोखाधड़ी रोकने के लिए बेहतर कागज, चेक में अदृश्य लोगो और वाटर मार्क जैसे अतिरिक्त सुरक्षा फीचर जोड़े जाएंगे। इस बारे में भी उसने सभी बैंकों को निर्देश फरवरी, 2010 में ही जारी कर दिए थे।

---इन बातों का रखें ख्याल---

1-न मिटाई जा सकने वाली स्याही का प्रयोग करें

2-दिन, महीने और साल को सटीक भरें

3-जिसे चेक काट रहे हों, उसका नाम सही लिखें

4-दी जाने वाली राशि को ध्यान से भरें

5-हस्ताक्षर करने में काट-पीट कतई न करें

बुधवार, 21 अप्रैल 2010

संसद में फिर गूंजी मैनपुरी की बदहाल रेल सेवायें


मंगलवार को संसद में एक बार फिर मैनपुरी की बदहाल रेल सेवाओं की गूंज रही। तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़ी इटावा मैनपुरी रेलवे परियोजना 13 वर्ष बाद भी पूरी न होने पर संसद में जनपद के सांसद रहे तथा वर्तमान में बदांयू के सांसद धर्मेन्द्र यादव ने आश्चर्य जताया और कहा कि केन्द्र सरकार मैनपुरी के साथ जानबूझ कर सौतेला व्यवहार कर रही है। सांसद ने मैनपुरी गजरौला तक नये रेलवे ट्रेक की मंजूरी मिलने के बाद मैनपुरी को इस योजना से हटाने की निंदा की और रेल मंत्री से मांग की कि मैनपुरी को तत्काल इस योजना से जोड़ा जाये।

मंगलवार को लोकसभा में सांसद धर्मेन्द्र यादव ने कहा कि वर्तमान रेलवे व्यवस्था बीस फीसदी उच्च वर्ग के लोगों का शिकार हो गयी है। बीस फीसदी लोगों के लिये अस्सी फीसदी सीटें रिजर्व हो जाती हैं और अस्सी फीसदी लोगों को बीस फीसदी रेल डिब्बों में यात्रा करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि तत्काल जनरल बोगियों की संख्या बढ़ाई जाये। श्री यादव ने 13 वर्ष पूर्व 1996-97 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा द्वारा घोषित की गयी इटावा मैनपुरी के बीच 67 किलोमीटर लम्बी रेल लाइन पूरी न होने पर नाराजगी जाहिर की और कहा केन्द्र सरकार ने स्वीकृत 55 करोड़ के स्थान पर अब तक 15 करोड़ रुपये ही दिये हैं ऐसे में ये योजना कैसी पूरी हो। उन्होंने कहा कि इस नये रेलवे ट्रेक का शिलान्यास तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने किया था। शिलान्यास के मौके पर तत्कालीन रेल मंत्री ने इस रेलवे ट्रेक का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति के हाथों ही कराने का वादा भी किया था। मगर अफसोस ऐसा नहीं हुआ। उन्होंने मांग की कि इस रेलवे ट्रेक को जल्द शुरू कराया जाये। सांसद ने वर्ष 2008-09 में स्वीकृत हुयी मैनपुरी से एटा, एटा से बदांयू सम्भल, गजरौला तक नयी रेलवे लाइन में मैनपुरी को इस बजट में छोड़े जाने पर मांग की कि ये मैनपुरी के साथ अन्याय है। रेल मंत्री ने इस बजट से एटा से कासगंज का हिस्सा ही स्वीकृत किया है। सम्भल, गजरौला का भी हिस्सा स्वीकृत है। लेकिन मैनपुरी से एटा तक रेलवे लाइन को छोड़ दिया गया है। उन्होंने कहा कि मैनपुरी से गजरौला तक नयी रेल लाइन बने तो यूपी के मैनपुरी, एटा, कासगंज, बदांयू, मुरादाबाद, अमरोहा, सम्भल जिले के लोग विकास की दौड़ में शामिल हो जायेंगे। उन्होंने जोड़ा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री आईके गुजराल ने वर्ष 1997 में बदांयू में जाकर बरेली से कासगंज, बदांयू होते हुये रेलवे लाइन आमान परिवर्तन करने की बात कही थी मगर यह भी नहीं हुआ।

वैश्य एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष आनंद स्वरूप अग्रवाल, सपा के प्रदेश सचिव प्रभाष मिश्रा आदि ने केन्द्र सरकार के इस कार्य को असहनीय बताया है और कहा है कि इटावा, मैनपुरी और मैनपुरी से गजरौला के ट्रेक को जल्द शुरू न कराया गया तो मैनपुरी के लोग सरकार के विरुद्ध आंदोलन करेंगे।

मंगलवार, 20 अप्रैल 2010

इस मौसम में गर्मी को ऐसे दें मात


अन्य ऋतुओं की तुलना में गर्मी के मौसम में कुछ ज्यादा ही बीमारियां पैदा होती है। एक सामान्य व्यक्ति यानी जिसे कोई बीमारी हो, वह भी गर्मी के प्रकोप का शिकार हो सकता है। जैसे लू लगना आदि। वहीं जो लोग पहले से ही सांस की बीमारी , हाइपरथायरायड, डाइबिटीज या हाई ब्लडप्रेशर, हृदय रोगों, टीबी, पेट की तकलीफों आदि से पीड़ित हैं, उनमें गर्मी के कारण कई नई समस्याएं पैदा हो सकती है, जो जानलेवा बन सकती हैं। इस मौसम में लोगों को ये समस्याएं पैदा हो सकती हैं

धड़कन तेज होना या घबराहट होना।

थकान, नींद अधिक आना, सुस्ती या फिर रात में नींद न आना।

उलझन ।

पेट की तकलीफें जैसे पेट फूलना, जी मिचलाना, उल्टी, दस्त, भूख न लगना,एसीडिटी व गैस की शिकायत।

पेशाब में जलन या रुकावट। डीहाइड्रेशन के कारण कम पेशाब होना।

सिर दर्द, सिर भारी होना, चक्कर आना, और सीने का दर्द

संक्रमण का दुष्प्रभाव

गर्मियों में जीवाणुओं का संक्रमण व वाइरल इंफेक्शंस भी कई गुना बढ़ जाते है। जैसे सेप्टीसीमिया, हेपेटाइटिस, टाइफाइड, कोलाइटिस व गैस्ट्रोइंटेटाइटिस आदि। इसके अलावा मच्छरों के बढ़ने से मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया व कालाजार आदि बीमारियां फैलती है।

क्रॉनिक बीमारियां

जो व्यक्ति पहले से ही किसी लम्बी (क्रॉनिक)बीमारी से ग्रस्त हैं,उनकी शिकायतें भी गर्मी के प्रकोप से गंभीर हो सकती है जैसे-

डाइबिटीज के मरीज

भूख कम लगने से या जी मिचलाने, और उल्टी-दस्त के कारण इनका ब्लड शुगर कम हो सकता है(हाइपोग्लाइसीमिया)। इसके अलावा लापरवाही बरतने पर ब्लडशुगर का स्तर भी बढ़ सकता है(हाइपरग्लाईसीमिया)।

हृदय रोगी

गर्मियों में हृदय रोगी अधिक तनाव में रहते है। इसलिए उनमें एंजाइना व हार्ट अटैक की संभावनाएं बढ़ जाती है।

क्या करे:-

लू से बचाव के लिए धूप से बचाव करें और घर से निकलने से पहले ताजा भोजन करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

खाने में तरल पदार्थ ज्यादा हो और ठोस कम। मट्ठा, दाल, कढ़ी, रसे की सब्जी, जूस, सूप, नींबू पानी, जलजीरा, आम का पना व दही व लस्सी आदि का सेवन करें।

ताजा खाना ही खाएं। बासी भोजन से बचें और फास्ट फूड्स से परहेज करें।

शरीर को ठंडा रखें। जैसे- बाहर निकलने से पहले स्नान करे। सिर पर गीला गमछा रखें। छाता इस्तेमाल करे।

थोड़ा-थोड़ा खाना बार-बार खाएं। एक साथ अधिक न खाएं, क्योंकि गर्मी के प्रकोप से पेट फूलता है और जी मिचलाता है।

मैदा, घी व डालडा आदि से परहेज करें।

जहां तक संभव हो कूलर, एसी, ठंडी जगह व खुली जगह में बैठे। कुछ न हो तो फर्श पर पानी डाल लें।

क्रानिक डिसीज(जैसे मधुमेह, हृदय रोग आदि) से ग्रस्त व्यक्ति असामान्य लक्षणों के प्रकट होते ही विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें।

अगर बुखार अचानक तेज हो जाए,तो डॉक्टर के परामर्श से दवा लें।


डॉ. आरती लालचंदानी

(फिजीशियन व हृदय रोग विशेषज्ञ)

बुधवार, 14 अप्रैल 2010

फसलां दी मुक गई राखी, ओ जट्टा आई बैसाखी !!


पंजाबी में 'मुक' का अर्थ है खत्म होना और 'राखी' रखवाली को कहते हैं। यहां दिए गए शीर्षक का मतलब है कि बैसाखी आने पर फसल तैयार है। खेतों की रखवाली का काम जो महीनों से चल रहा था, वह अब समाप्त हो गया है। तैयार फसल को बेचकर घर में आने वाले धन की खुशी से झूम उठते हैं किसान..।

कृषि प्रधान प्रदेश पंजाब में बैसाखी का पर्व हर साल फसल तैयार होने की खुशी में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है। ढोल की थाप और भंगड़े-गिद्दे के रंग दिलों को इंद्रधनुषी उमंग से भर देते है। खुशहाली और समृद्धि के इस पर्व के साथ ही जुड़ा है खालसा की स्थापना का महत्व।

[खालसा की स्थापना]

13 अप्रैल, 1699 को सिखों के दसवें गुरु गोबिंद राय जी ने आनंदपुर साहिब के श्री केसगढ़ साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी।

[पंज-प्यारे]

श्री आनंदपुर साहिब में बैसाखी के दिन गुरु जी की आज्ञानुसार दीवान सजाया गया। समूचा सिख समाज वहां एकत्रित था। गुरबाणी संगत के कानों में अमृतरस घोल रही थी। तभी दशम पातशाह ने उठकर सिखों से कहा कि मुझे धर्म और मानवता की रक्षा के लिए पांच शीश चाहिए। अपनी कृपाण लहराते हुए गुरु जी ने ललकारा कि 'कौन मुझे अपना सिर भेंट करने के लिए तैयार है।' संगत सन्न रह गई। कुछ लोग घबरा गए, तो कुछ वहां से खिसकने का मौका तलाशने लगे।

आखिर उन सहमे लोगों में से एक सिख साहस करके उठा और बोला, 'सच्चे पातशाह! धर्म और मानवता की रक्षा के महान कार्य के लिए मेरा तुच्छ शीश अर्पित है, स्वीकार करें।' यह सिख लाहौर का रहने वाला दया राम था। गुरु जी उसे एक तम्बू में ले गए। जब गुरु जी तम्बू में से बाहर आए, तो उनकी श्री साहिब से लहू टपक रहा था। गुरु जी ने दोबारा एक और शीश की मांग की। इस बार दिल्ली का धरम दास शीश भेंट करने के लिए उठा। उसे भी तम्बू में ले जाया गया और कुछ ही पलों बाद रक्त-रंजित कृपाण लेकर गुरु जी ने फिर आकर ललकारा, 'और शीश चाहिए।' इस बार द्वारिका पुरी से आए सिख मोहकम चंद उठे, फिर जगन्नाथ पुरी के भाई हिम्मत राय और बीदर से आए भाई साहिब चंद ने हामी भरी।

कुछ समय बाद उपर्युक्त पांचों सिख सुंदर पोशाक 'श्री साहिब' धारण किए हुए तम्बू में से बाहर आए। दशमेश पिता ने इन पांचों को 'पंज प्यारे' नाम दिया और अमृत छका कर सिख सजा दिया यानी उन्हें सिख के रूप में मान्यता दे दी। उसी समय गुरु जी ने सिंहों (सिखों) के लिए पंच ककार-केस, कंघा, कड़ा, कच्छ एवं कृपाण धारण करने का विधान बनाया।

[अमृतपान और सिंह उपनाम]

अमृत की तैयारी के लिए गुरु जी ने पंज प्यारों की उपस्थिति में लोहे के बर्तन में जल डाला। जपुजी साहिब, जाप साहिब, सवैये, चौपाई एवं आनंद साहिब पांच वाणियों का पाठ करते हुए गुरु जी जल में खंडा फेरते रहे। फिर वीर आसन में बैठ कर पंज प्यारों ने अमृत छका और 'सिंह' उपनाम से सुशोभित हुए। इसके बाद दशमेश पिता ने स्वयं पंज प्यारों से अमृत छका और गोबिंद राय से गोबिंद सिंह बन गए। इतिहासकारों के अनुसार, उस दिन हजारों प्राणियों ने अमृतपान किया और ऊंच-नीच, जाति-पाति व भेदभाव को त्याग कर एक ही ईश्वर की संतान बन खालसा यानी शुद्ध, खालिस बन गए। इस प्रकार दलित-शोषित मानवता की रक्षा के लिए अकाल पुरुष की फौज तैयार हो गई। इस प्रकार खालसा पंथ की स्थापना करके गुरु गोबिंद सिंह जी ने चिड़ियों में बाज जैसी शक्ति भर दी।

[नव सौर वर्ष भी है बैसाखी]

सिखों का पर्व 'बैसाखी' हिंदुओं के लिए 'वैशाखी' के नाम से जाना जाता है। वैशाख संक्रांति होने के कारण इस दिन स्नान-दान का विशेष महत्व होता है। साथ ही इस दिन सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करने के कारण इसे सौर वर्ष की शुरुआत माना जाता है।

अप्रैल 1875 में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी और मूर्ति पूजा के बजाय वेदों को अपना मार्गदर्शक माना। संयोगवश वह दिन भी वैशाखी का ही था।

इसी प्रकार बौद्ध धर्म के कुछ अनुयायी मानते हैं कि महात्मा बुद्ध को इसी दिन दिव्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अत: यह दिन उनके लिए भी विशेष महत्व रखता है। कृषि से जुड़े इस पर्व को असम में 'बीहू', केरल में 'विशु' तथा तमिलनाडु में 'पुथांदू' कहा जाता है।

[वंदना वालिया बाली]

आप सब कों पावन बैशाखी पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं !

हिंदी की हर समस्या का हल इंटरनेट पर!


गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग ने कंप्यूटर पर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए इससे जुड़ी सभी समस्याओं का हल एक जगह उपलब्ध करवा दिया है। यह सारी सामग्री इंटरनेट पर तो उपलब्ध होगी ही, किताब के रूप में भी उपलब्ध करवा दी गई है। गृह राज्य मंत्री अजय माकन ने मंगलवार को केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान द्वारा तैयार किए गए 'हिंदी शब्द संसाधन' का लोकार्पण किया।

माकन ने इसके इंटरनेट और किताब दोनों संस्करणों को जारी करते हुए बताया कि 'राजभाषा.एनआईसी.इन' वेबसाइट पर भी इसे उपलब्ध करवा दिया गया है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि बड़ी संख्या में लोग हिंदी में कंप्यूटर का उपयोग करना चाहते हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में इनके लिए मुश्किल हो रही है। लिहाजा, कंप्यूटर और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ही हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह पहल की गई है।

माकन के मुताबिक केंद्रीय हिंदी प्रशिक्षण संस्थान की ओर से तैयार 'हिंदी शब्द संसाधन' की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी मदद से कोई भी व्यक्ति किसी भी समय, किसी भी कंप्यूटर पर हिंदी में काम करना शुरू कर सकता है। इसके लिए उसे किसी खास साफ्टवेयर या फांट खरीदने की जरूरत नहीं है। यहां तक कि अगर वह हिंदी में टाइपिंग नहीं भी जानता तो भी वह अपना काम चला सकता है।

मंगलवार, 13 अप्रैल 2010

कैमियो रोल में वी.के. सिंह


फिल्म का दृश्य कुछ यूं है, कुछ आतंकवादियों ने स्कूली बच्चों की एक बस को बंधक बना लिया है। उस स्थान से कुछ दूरी पर स्थित कमांडो ट्रेनिंग कैम्प में सेना के अधिकारी बंधक बच्चों को छुड़ाने के लिए योजना बना रहे हैं। एक ब्रिगेडियर अपने अधिकारी मेजर चौहान को मिशन के लिए ताकीद करते हुए कहते हैं कि हमारे पास इलाके की कुछ स्लाइड्स हैं, जिन्हें एक्सप्लेन करेंगे कनर्ल वी.के. सिंह। मेजर चौहान की भूमिका में नाना पाटेकर हैं। इसके बाद कुछ क्षणों के लिए वी.के. सिंह दृश्य में आते हैं। यद्यपि उनके कोई डायलॉग नहीं हैं। उनकी एक झलक ही दर्शकों को मिलती है। फिल्म के दृश्य में नजर आने वाले कर्नल वी.के. सिंह हमारे नए सेनाध्यक्ष है। यहां जिस फिल्म के दृश्य का जिक्र है, वह है प्रहार।

यह बात दो दशक पहले की है। दरअसल करीब 20 साल पहले 1990 में वी.के. सिंह बेलगाम स्थित भारतीय सेना के कमांडो ट्रेनिंग सेंटर में इंस्ट्रक्टर थे। वी.के. सिंह के अनुसार ''उस कमांडो ट्रेनिंग सेंटर में प्रहार फिल्म की शूटिंग की जा रही थी। फिल्म के निर्देशक नाना पाटेकर उस दृश्य में वास्तविकता जोड़ने के लिए किसी सेना अधिकारी की मौजूदगी दर्शाना चाहते थे।'' गौरतलब है कि वी.के. सिंह सेनाध्यक्ष बनने वाले पहले कमांडो हैं।


हम सब की ओर से सिंह साहब कों बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं !

सोमवार, 12 अप्रैल 2010

शायद मैं वापस आ गया हूँ !!

३१ मार्च २००९ जब closing के pressure ने जान सुखा हुयी थी तब बैठ हुए अचानक ही ख्याल आया क्यों ना एक ब्लॉग बनाया जाये जहाँ अपने मन की बाते लिखा करुगा या वह मुद्दे जिन से मैं प्रभावित होता हूँ उन पर अपनी राय दिया करुगा ............( यहाँ बता दू कि जी हाँ मैं राय भी दे दिया करता हूँ कभी कभी......... क्या करू साहब आदत से मजबूर हूँ ) सो लीजिये जनाब बना लिया गया "बुरा भला" !!

२४ नवम्बर २००९ तक सब कुछ ठीक था खूब मज्जे रहे थे नयी नयी पोस्टो पर नए नए लोगो से नए नए कमेंट्स पा कर..................... पर अचानक ही AIRCEL वालों कों पता चला कि मिश्रा जी unlimited पैक का फायेदा कुछ जयादा ही unlimted हो कर उठा रहे है तो साहब और कुछ तो नहीं बंद किया मेरी ब्लॉग्गिंग बंद करवा दी !

खूब हाथ पैर मारे कि कुछ तो हो पर नहीं ...................फिर बात हुयी झा बाबु से उन्होंने बताया कि पाबला जी कि मदद ले कर देखो तो हम पहुचे उन तक ( अरे भाई फ़ोन से ही ) ! पाबला जी ने भी खूब साथ निभाया पर आखिर तक यही निष्कर्ष पर पहुचे कि "प्रॉब्लम ISP की है!!" तब हम भी हार कर बैठ गए !

फिर समय समय पर कोशिश चलती रही की ब्लॉग्गिंग चलती रहे पर हो नहीं पाया ! आज जब एक बार फिर कोशिश की तो काम बनता दिख रहा है इसी लिए उम्मीद कर रहा हूँ कि "शायद मैं वापस गया हूँ !!"


मैं बता नहीं सकता इतने दिनों तक ब्लॉग्गिंग से दूर रहना कितना कठिन था मेरे लिए ............... पर मेरे मित्र जानते है मैं ब्लॉग्गिंग से तो दूर था पर उन से नहीं !!

आप सब से अब तक जितना स्नेह मिला है उसके लिए आप सब का सदेव ऋणी रहूगा !


आप के ब्लॉग "बुरा भला" के एक साल और ४०० वी पोस्ट के पूरे होने पर आप सब कों बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयाँ !!

ब्लॉग के सबसे पहेली पोस्ट का लिंक दे रहा हूँ :-
http://burabhala.blogspot.com/2009/03/blog-post.html


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