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सोमवार, 30 मई 2011

विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2011 पर एक रि पोस्ट

धूम्रपान
एक कार्य महान

सिगरेट
है संजीवनी
पीकर
स्वास्थ्य बनाओ

समय
से पहले बूढ़े होकर
रियायतों
का लाभ उठाओ

सिगरेट
पीकर ही
हैरी और माइकल निकलते हैं

दूध
और फल खाकर तो
हरगोपाल
बनते हैं

जो
नहीं पीते उन्हें
इस
सुख से अवगत कराओ

बस में रेल में घर में जेल में
सिगरेट
सुलगाओ

अगर
पैसे कम हैं
फिर
भी काम चला लो

जरूरी
नहीं है सिगरेट
कभी कभी बीड़ी सुलगा लो

बीड़ी
सफलता की सीढ़ी
इस
पर चढ़ते चले जाओ

मेहनत
की कमाई
सही
काम में लगाओ

जो
हड्डियां गलाते हैं
वो
तपस्वी कहलाते हैं


कलयुग के दधीचि
हड्डियों
के साथ करो
फेफड़े
और गुर्दे भी कुर्बान

क्योंकि
धूम्रपान
एक कार्य महान ||
(कभी एक मित्र ने ऑरकुट पर यह राय दी थी....सोचा आप ही क्यों वंचित रहे !)

गुरुवार, 26 मई 2011

वाह क्या कहने साइंस के !

पेंगुइन बिना सांस लिए कितनी देर तक पानी में रह सकता है? क्या खाड़ी देशों की जमीन सिकुड़ती जा रही है? विज्ञान के ऐसे ही कई सवाल आपके दिमाग में उठते होंगे, तो जवाब हाजिर है। 

http://www.sciencenewsforkids.org/ एक ऐसी वेबसाइट है, जहां आप विज्ञान संबंधित ज्यादातर प्रश्नों का हल ढूंढ सकते हो। यहां इन जानकारियों को काफी रोचक अंदाज में बताया गया है। इसलिए दुनिया भर के न केवल स्टूडेंट्स, बल्कि टीचर्स भी इस साइट को खंगालते हैं। लगभग 50 हजार व्यक्ति रोजाना इस साइट को हिट करते हैं। दरअसल, इसमें फिजिक्स, स्पेस, फॉसिल्स, वेदर और एन्वॉयरनमेंट को भी कवर किया गया है। साइट पर एक आइकन मौजूद है- हुमन ऐंड हेल्थ। इसे क्लिक करते ही नींद अधिक आने की वजह, मोटापे का ब्रेन पर प्रभाव आदि जैसे सवालों के जवाब आप पा सकते हो। टेक ऐंड मैथ ऑप्शन से आप सेल फोन के ब्रेन पर प्रभाव जान सकते हो। यदि आप साइंस प्रोजेक्ट्स के लिए प्लान बनाना चाहते हो, तो इस साइट पर कई आइडियाज है। दिमागी कसरत के लिए ब्रेन टीजर, पजल, साइंस फिक्शन के ऑप्शन भी मौजूद हैं। इसकी खासियत है कि इसे समय-समय पर अपडेट किया जाता है। 

तो इन गर्मियों की छुट्टियों का सदुपयोग करते हुए ... अपने लिए और बच्चो के लिए समय निकाल कर ... आइये चले विज्ञान की दुनिया में !!

बुधवार, 18 मई 2011

शादी कार्ड में राष्ट्रीय चिन्ह, फंस सकते हैं विजेंद्र

भारत के स्टार मुक्केबाज विजेंद्र सिंह अपने विवाह के निमंत्रण पत्र को लेकर मुश्किलों में फंस सकते हैं। उनके निमंत्रण पत्र पर राष्ट्रीय चिन्ह दर्शाया गया है और यह कानून के तहत एक तरह का अपराध है।
मंगलवार 17 मई को दिल्ली में हुई विजेंद्र की शादी में कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी, भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष अभय सिंह चौटाला, केंद्रीय मंत्री सैलजा, सांसद राजीव शुक्ला के अलावा खेल जगत की कई हस्तियां मौजूद थी। विजेंद्र ने कल ही चार साल के प्रेम संबंध के बाद अर्चना से दिल्ली में शादी रचाई है।
राष्ट्रीय चिन्ह के इस्तेमाल को लेकर स्टेट एंबलम एक्ट 2005 बनाया गया है। कोई भी निजी व्यक्ति इसका इस्तेमाल नहीं कर सकता, क्योंकि किसी कागज पर इसका होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति केंद्र सरकार से ताल्लुक रखता है या फिर जिस दस्तावेज पर यह दर्शाया गया है, वह केंद्र सरकार का है। अगर इस तरह का कोई मामला सामने आता है तो वह केंद्र के समक्ष भेजा जाएगा और सरकार का फैसला अंतिम होगा। इसका इस्तेमाल या तो सरकारी मोहर में हो सकता है या फिर संवैधानिक व्यक्ति इसका प्रयोग कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति इसका इस्तेमाल निजी तौर पर करता है और वह एक्ट के उल्लंघन का दोषी पाया जाता है तो उसके लिए सजा का भी प्रावधान है।
अधिनियम की धारा 3 के तहत अधिकतम दो साल की कैद या पांच हजार रुपये जुर्माना या फिर सजा व जुर्माना एक साथ भी किए जा सकते हैं। कोई व्यक्ति दूसरी बार इस तरह की गलती करता है तो उसे फिर से छह माह से लेकर दो साल तक की कैद भुगतनी होगी।

रविवार, 15 मई 2011

एक रि पोस्ट :- जन्मदिन पर विशेष :- क्रांतिकारी सुखदेव को अंग्रेजों ने दी बिना जुर्म की सजा

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष और इतिहासकार चमन लाल का कहना है कि सांडर्स हत्याकांड में सुखदेव शामिल नहीं थे, लेकिन फिर भी ब्रितानिया हुकूमत ने उन्हें फांसी पर लटका दिया। उनका कहना है कि राजगुरु, सुखदेव और भगत सिंह की लोकप्रियता तथा क्रांतिकारी गतिविधियों से अंग्रेजी शासन इस कदर हिला हुआ था कि वह उन्हें हर कीमत पर फांसी पर लटकाना चाहता था।

अंग्रेजों ने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की फांसी को अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और वे हर कीमत पर इन तीनों क्रांतिकारियों को ठिकाने लगाना चाहते थे। लाहौर षड्यंत्र [सांडर्स हत्याकांड] में जहां पक्षपातपूर्ण ढंग से मुकदमा चलाया गया, वहीं अंग्रेजों ने सुखदेव के मामले में तो सभी हदें पार कर दीं और उन्हें बिना जुर्म के ही फांसी पर लटका दिया।
उन्होंने कहा कि सांडर्स हत्याकांड में पक्षपातपूर्ण ढंग से मुकदमा चलाया गया और सुखदेव को इस मामले में बिना जुर्म के ही सजा दे दी गई। पंद्रह मई १९०७ को पंजाब के लायलपुर [अब पाकिस्तान का फैसलाबाद] में जन्मे सुखदेव भी भगत सिंह की तरह बचपन से ही आजादी का सपना पाले हुए थे। ये दोनों लाहौर नेशनल कॉलेज के छात्र थे। दोनों एक ही सन में लायलपुर में पैदा हुए और एक ही साथ शहीद हो गए।
चमन लाल ने बताया कि दोनों के बीच गहरी दोस्ती थी। चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्प्यूट बिल के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने के लिए जब हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी [एचएसआरए] की पहली बैठक हुई तो उसमें सुखदेव शामिल नहीं थे। बैठक में भगत ने कहा कि बम वह फेंकेंगे, लेकिन आजाद ने उन्हें इजाजत नहीं दी और कहा कि संगठन को उनकी बहुत जरूरत है। दूसरी बैठक में जब सुखदेव शामिल हुए तो उन्होंने भगत सिंह को ताना दिया कि शायद तुम्हारे भीतर जिंदगी जीने की ललक जाग उठी है, इसीलिए बम फेंकने नहीं जाना चाहते। इस पर भगत ने आजाद से कहा कि बम वह ही फेंकेंगे और अपनी गिरफ्तारी भी देंगे।
चमन लाल ने बताया कि अगले दिन जब सुखदेव बैठक में आए तो उनकी आंखें सूजी हुइ थीं। वह भगत को ताना मारने की वजह से सारी रात सो नहीं पाए थे। उन्हें अहसास हो गया था कि गिरफ्तारी के बाद भगत सिंह की फांसी निश्चित है। इस पर भगत सिंह ने सुखदेव को सांत्वना दी और कहा कि देश को कुर्बानी की जरूरत है। सुखदेव ने अपने द्वारा कही गई बातों के लिए माफी मांगी और भगत सिंह इस पर मुस्करा दिए। दोनों के परिवार लायलपुर में पास-पास ही रहा करते थे।

भारत माँ के इस सच्चे सपूत सुखदेव को उनके जन्मदिन के अवसर पर हम सब की ओर से शत शत नमन !!
वन्दे मातरम !!

शनिवार, 14 मई 2011

काश ऐसा हो जाए ...

कल बंगाल की जनता ने एक बदलाव की घोषणा की है ...
एक बदलाव हम भी चाहते है ...
 
  आप की क्या राय है ???

रविवार, 8 मई 2011

|| माँ ||

बेसन की सौधी रोटी पर
खट्टी चटनी - जैसी माँ
याद आती है चौका - बासन
चिमटा , फुकनी - जैसी माँ ||

बान की खुर्री खाट के ऊपर
हर आहट पर कान धरे
आधी सोयी आधी जागी
थकी दोपहरी - जैसी माँ ||

चिडियों की चहकार में गूँजे
राधा - मोहन , अली - अली
मुर्गे की आवाज़ से खुलती
घर की कुण्डी - जैसी माँ ||

बीवी , बेटी , बहन , पडोसन
थोडी - थोडी सी सब में
दिन भर एक रस्सी के ऊपर
चलती नटनी - जैसी माँ ||

बाँट के अपना चहेरा , माथा
आँखे जाने कहाँ गई
फटे पुराने एक एल्बम में
चंचल लड़की - जैसी माँ ||


----- निदा फाजली .



मेरी माँ और हर माँ को समर्पित |



|| वन्दे मातरम ||

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